ब्रज की सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली रासलीला संस्था की प्रमुख प्रस्तुतियों में शामिल है। इसमें भगवान श्री कृष्ण के बाल्यकाल, गोचारण, कालियदमन, गोवर्धन लीला, महारास तथा अन्य लीलाओं का पारम्परिक शैली में मंचन किया जाता है।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जीवन, आदर्शों और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित राम लीला का मंचन संस्था की नियमित सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण भाग है।
ब्रज का प्रसिद्ध पारम्परिक लोक नृत्य, जिसमें कलाकार सिर पर दीपों से सुसज्जित चरकुला धारण कर नृत्य प्रस्तुत करते हैं। यह नृत्य ब्रज की लोक परम्परा और उत्सव धर्मिता का प्रतीक माना जाता है।
भगवान श्री कृष्ण और ब्रजकी प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक परम्पराओं से प्रेरित मयूर नृत्य अपनी मनोहारी शैली और आकर्षक प्रस्तुति के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
ब्रज अंचल की पारम्परिक लोक नृत्य विधा, जो स्थानीय लोक जीवन, सामाजिक परम्पराओं और सांस्कृतिक उत्सवों का प्रतिनिधित्व करती है।
ब्रज की लोक गायन परम्परा का महत्वपूर्ण अंग। विशेष रूप से होली और वसंत ऋतु में गाए जाने वाले रसिया एवं फाग ब्रज की सांगीतिक विरासत का जीवंत स्वरूप हैं।
श्री कृष्ण भक्ति, संत परम्परा और ब्रज के आध्यात्मिक वातावरण से जुड़े भजन, संकीर्तन एवं पारम्परिक लोक गायन संस्था की नियमित प्रस्तुतियों का अभिन्न हिस्सा हैं।
भारतीय संस्कृति, लोक जीवन, धार्मिक परम्पराओं और सामाजिक विषयों पर आधारित लोक नाट्य तथा सांस्कृतिक झाँकियाँ संस्था द्वारा विभिन्न अवसरों पर प्रस्तुत की जाती हैं।
संस्था द्वारा जन्माष्टमी, राधाष्टमी, झूलनउत्सव, ब्रजहोली, फूलों की होली, लट्ठमार होली, गोवर्धन पूजा, अन्नकूट तथा अन्य पारम्परिक उत्सवों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की जाती हैं।
ब्रज लोक कला मण्डल का प्रयास है कि प्रत्येक प्रस्तुति अपनी पारम्परिक शैली, सांस्कृतिक गरिमा और मौलिक स्वरूप के साथ दर्शकों तक पहुँचे तथा ब्रज की लोक विरासत का प्रामाणिक परिचय प्रस्तुत करे।