भारत की आध्यात्मिक राजधानी कहे जाने वाले ब्रज मंडल की पावन भूमि, जहाँ यमुना की लहरों में श्रीकृष्ण की मधुर वंशी की ध्वनि आज भी अनुभव की जाती है, जहाँ वृंदावन की गलियों में भक्ति और प्रेम का अमृत प्रवाहित होता है, जहाँ गोवर्धन की परिक्रमा में आस्था का अद्भुत संगम दिखाई देता है और जहाँ बरसाना, नंदगाँव, गोकुल एवं मथुरा का प्रत्येक कण श्री राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं का साक्षी है—उसी अनंत सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं लोककलात्मक विरासत को संरक्षित, संवर्धित और विश्व पटल पर स्थापित करने के उद्देश्य से ब्रज लोक कला मण्डल, मथुरा निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रहा है।
स्वर्गीय श्री रघुनाथ सिंह जी द्वारा श्री हनुमान जी महाराज के श्रीचरणों में पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण के साथ वर्ष 2010 में स्थापित यह संस्थान आज ब्रज संस्कृति, लोककला, लोकसंगीत, लोकनाट्य और आध्यात्मिक परंपराओं का एक प्रतिष्ठित एवं विश्वसनीय केंद्र बन चुका है।
यह केवल एक सांस्कृतिक संस्था नहीं, बल्कि ब्रज की जीवंत आत्मा, उसकी लोक परंपराओं का संरक्षण केंद्र और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर का भंडार है। संस्था का उद्देश्य केवल कार्यक्रम प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि ब्रज की संस्कृति को उसके मूल स्वरूप में सुरक्षित रखना, नई पीढ़ी को उससे जोड़ना तथा वैश्विक स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करना है।
पिछले दो दशकों से अधिक समय से संस्था ने ब्रज के लोकगीतों, रासलीलाओं, रामलीलाओं, चरकुला नृत्य, मयूर नृत्य, रसिया, संकीर्तन, भजन, लोकनाट्य और अनेक पारंपरिक कलाओं को संरक्षित एवं प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ब्रज लोक कला मण्डल ने ग्रामीण क्षेत्रों के लोक कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया है। संस्था का प्रत्येक कार्यक्रम केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति, अध्यात्म, इतिहास और लोकजीवन का जीवंत दर्शन होता है।
स्वर्गीय श्री रघुनाथ सिंह जी ने ब्रज संस्कृति, लोककला एवं आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण हेतु इस संस्था की स्थापना की। उनकी दूरदर्शिता, सांस्कृतिक प्रतिबद्धता और समाज के प्रति समर्पण ने संस्था को एक मजबूत आधार प्रदान किया।
आज ब्रज लोक कला मण्डल जिस सम्मान और पहचान के साथ कार्य कर रहा है, वह उनके सांस्कृतिक दृष्टिकोण एवं समर्पण का परिणाम है।
"संस्कृति केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा है।"
ब्रज केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम, कला और संस्कृति की जीवंत चेतना है। ब्रज लोक कला मण्डल का उद्देश्य इस अमूल्य विरासत को संरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों और वैश्विक समाज तक पहुँचाना है।
हम कलाकारों को मंच प्रदान करने, युवाओं को संस्कृति से जोड़ने और ब्रज की गौरवशाली परंपराओं को विश्व मंच तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।
“जहाँ ब्रज की संस्कृति केवल जीवित नहीं, बल्कि विश्व को प्रेरित करती है।”